अफ़ग़ानिस्तान में जिस तरह के हालात हैं उन्हें देखते हुए एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत के पास मुख्य तौर पर दो रास्ते हैं। पहला तो ये कि Taliban के आने के बाद भारत Afghanistan से निकल जाए। ऐसा होने से भारत द्वारा Afghanistan में किए गए दशकों के काम कुछ ही दिनों में खत्म हो सकते हैं। दूसरा यह कि भारत Taliban से बात करे तो उसके साथ डील करते हुए काम करे लेकिन यह ज्यादा मुश्किल भरा है क्योंकि भारत सरकार अब तक Afghanistan सरकार का समर्थन करती आई है और Afghanistan सरकार को ही अफगानों का प्रतिनिधि मानती रही है। तो क्या और कोई रास्ता नहीं है?
एक है बीच का रास्ता। जिसे लेकर हाल के दिनों में कई एक्सपर्ट्स ने बात की है। इसे लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को Taliban से बातचीत शुरू करने की कोशिश करनी चाहिए और Afghanistan में जारी विकास कामों को पूरा करना चाहिए। भले ही यह धीमे हो या सांकेतिक स्तर पर ही क्यों न हो लेकिन एक ओर भारत यूनाइटेड नेशंस में Afghanistan के भविष्य और Taliban पर प्रतिबंधों को लेकर बात कर रहा है और दूसरी ओर Taliban शासन से समझौता भारत के लिए बेहद मुश्किल होगा।
कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारत सरकार Taliban को भले मान्यता न दे, लेकिन उसे Taliban से बात करनी ही होगी। पिछले कुछ महीनों में हमने देखा है कि विदेश मंत्रालय ने कतर की राजधानी दोहा में जारी शांति समझौते के दौरान कई मीटिंग में भाग लिया है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा है कि वह Afghanistan को लेकर सभी स्टेकहोल्डर्स से बातें कर रहा है। सरकारी अधिकारियों ने भी कहा है कि वह IC-814 विमान के हुए अपहरण के दौरान जैसे हालात फिर से कतई नहीं चाहेंगे कि भारत के पास Taliban से डायरेक्ट संपर्क को लेकर दिक्कतें आए। Read more

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